अशोक का राजा बनना भी हमारी संस्कृति में एक बड़ा योगदान रहा है.पाटलिपुत्र पहला देश बना जहा मौत की सजा नहीं थी. जहा बलि की मनाही थी. इतिहास के उस दौर में यह बड़ी बात थी. आज भी उसका अनुशरण करने की ज़रूरत है. नफरत का जवाब नफरत हमारी संस्कृति का कभी भी हिस्सा नहीं रहा है. येही कई वज़हो में से एक मख्य वज़ह है की हमारी संस्कृति आज तक जीवित है. इसके कई मिसाल दी जा सकते है , पर उसकी ज़रूरत नहीं समझता.सादगी और सरलता हमारी संस्कृति की पहचान है और रहेंगे. बुद्ध ने शायद इसी की खोज की थी और अशोक ने इसी का विस्तार किया. सुजाता सरल और सादगी की ही प्रतिक है और उसका खीर ही उसकी मिठास है. आज भी यह हमारे खून में बसा है. जहाँ भी सादगी,सरलता और सच्चाई दिखती है हम उसकी तरफ खिचे chले जाते है.
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